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पीपीसी मॉडल के तहत निम्न वर्गो के लिए भी घर

पीपीसी मॉडल के तहत निम्न वर्गो के लिए भी घर

सुरत: सूरत नगर निगम (एसएमसी) ने आवासीय परियोजना का निर्माण पीपीसी मॉडल के तहत करने का फैसला लिया है | 879 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के अंतर्गत 7,500 घरों का निर्माण किया जायेगा | सबसे अहम बात तो ये है की ये परियोजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए लायी गयी है जिनके पास अपने घर घर नहीं है |

इस आवासीय परियोजना का निर्माण सार्वजनिक और निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत कम लागत से किया जायेगा |

प्रधान मंत्री आवास योजना के अंतर्गत योजना का आरम्भ शहर के चार स्थानों पर होगा जिसके लिए निजी बिल्डरों को इसके तहत पत्र भी जारी कर दिया गया है |

बता दे कि योजना के लिए अंबाणा क्षेत्र में छह बस्तियों का चयन किया गया जिसमें अनवरनगर, अंबेडकरनगर, हलपति वास, ख्वाजा नगर, विवेकानंद नगर और उमियानगर शामिल हैं | इसके साथ ही  योजना के लिए करीब 1.30 लाख वर्गमीटर भूमि का प्रयोग किया जायेगा और सभी 7500 झोपडि़यों को उच्च स्तरीय इमारतों में तब्दील किया जायेगा | जिसमे 25 वर्गमीटर वाले के दो कमरों के साथ  रसोई घर और बाथरूम भी होगा |

इसके साथ ही एसएमसी के अधिकारियों का कहना है कि जब तक इन नये घरों का निर्माण नहीं किया जाता है तब तक वे निवासियों के लिए पारगमन आवास उपलब्ध कराएंगे | साथ ही बिल्डरों को शेष भूमि या फ्लैटों के फ्रीलाइट अधिकार मिलेगा |

अगर योजना के पूरा होने और कब्ज़े की बात करे तो अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए हम तीन साल में घरों के कब्जे को लाभार्थियों को देने की उम्मीद कर रहे

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लोगों ने लगा दिया जाम, डंपिंग ग्राउंड बनाने का विरोध…

लोगों ने लगा दिया जाम, डंपिंग ग्राउंड बनाने का विरोध…

 

अंबाला : बाजीगर और मोहड़ा मंडी के पास नगर निगम सदर जोन के ठेकेदार द्वारा किराये पर जमीन लेकर डंपिंग ग्राउंड बनाने के विरोध में लोगों ने सोमवार को नन्हेड़ा रोड पर जाम लगा दिया। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन ठेकेदार की कूड़ा गिराने पहुंची ट्रालियों को भी लोगों ने घेर लिया और कूड़ा नहीं गिराने नहीं दिया गया। लोगों ने कहा कि वह नगर निगम के अफसरों से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक नाले की सफाई करने की गुहार लगा चुके हैं लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है।

दोनों कालोनियों ने निगम ने सफाई करने का मामला तो छोड़ दिया उल्टा उनकी कालोनी में ही कूड़ा गिराने के लिए ठेकेदार को जगह दे दी। मोहड़ी और बाजीगर बस्ती के प्रधान जगदीश ¨सह और कालोनी निवासी महावीर, पाला, ओम प्रकाश, पप्पू, सरदारा, सोना, आशा राम, बनवारी लाल और केवल ने बताया कि उनकी कालोनी की उत्तर की दिशा में पानी की डिग्गी बनी हुई है जिसमें छावनी एरिया का पानी आकर जमा हो जाता है। इस डिग्गी के पानी की निकासी के लिए एक नाला बना रखा है जो बाजीगर और मोहड़ा मंडी के बीच से होकर गुजर रहा है और आगे नन्हेड़ा से होते हुए आगे निकल रहा है। इस नाले की सफाई तीन साल पहले हुई थी।

कुछ दिनों पहले निगम के कुछ कर्मी आए एक जगह से जेसीबी मशीन के साथ कूड़ा निकाला और साइड में निकाल कर चले गए। यह कूड़ा यहीं पड़ा-पड़ा सूख गया है और बाकी नाले की सफाई नहीं की गई है। इसकी सफाई के लिए वह निगम अफसरों और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी वजह से लोग एकजुट हुए और रोड जाम कर दिया।

नगर निगम का ठेकेदार नियमों को अनदेखा कर टांगरी नदी में कूड़ा गिराने में लगा हुआ है। इस मामले के बारे में नगर निगम के अधिकारी भी खामोश हैं, लेकिन यह पर्यावरण संरक्षण के खिलाफ है। सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि निगम अभी तक अंबाला छावनी में डंपिंग ग्राउंड का चयन नहीं कर पाया है जिस पर दूसरे लोगों को आपत्ति न हो। इसीलिए ठेकेदार अपनी मनमर्जी से यहां वहां कूड़ा गिराने में जुटा है।

अवैध निर्माण पर नियमन का निर्णय

अवैध निर्माण पर नियमन का निर्णय

मुंबई: मुंबई सरकार ने अनधिकृत निर्माण के नियमितकरण को सक्षम करने के लिए एक अध्यादेश जारी करने को मंजूरी दे दी है | इसमें निर्माण के लिए उन बिल्डिंगों को रखा गया है जिनका निर्माण   31 दिसंबर, 2015 के पहले से रुका पड़ा है |

जबकि विधानसभा ने विनियमन को सक्षम करने के लिए महाराष्ट्र क्षेत्रीय नगर नियोजन अधिनियम के संशोधन को मंजूरी दे दी थी, परिषद ने इसे मंजूरी नहीं दी थी | मुख्यमंत्री का कार्यालय के अधिकारी का कहना है कि यह दूसरी बार अध्यादेश जारी किया जा रहा है |

संरचनाओं को नियमित करने की मांग करने वालों को जटिल शुल्क, बुनियादी ढांचे के शुल्क और प्रीमियम का भुगतान करना होगा |

हालांकि, विकास नियंत्रण विनियमों के अनुरूप केवल संरचनाएं नियमित हो सकती हैं | इससे 10,000 वर्ग फुट से अधिक भूखंडों पर अनधिकृत निर्माण के अभियोजन के लिए पिछले प्रतिबंधों की आवश्यकता को दूर करने की अनुमति भी मिलती है |

हाउसिंग फाइनेंस शेयरों में बरतें सावधानी

हाउसिंग फाइनेंस शेयरों में बरतें सावधानी

नई दिल्लीः एंबिट कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर के लिए आगे अच्छे दिनों की उम्मीद नहीं है। उन्होंने इस सेक्टर की 2 दिग्गज कंपनियों पर न सिर्फ बिकवाली की सलाह दी है बल्कि शेयरों में 30 से 40 फीसदी की गिरावट की आशंका जताई है।

एंबिट कैपिटल का मानना है कि एच.डी.एफ.सी. और एल.आई.सी. हाउसिंग फाइनेंस का क्रेडिट खर्च बढ़ा है, आगे इनके लोन ग्रोथ, मार्जिन पर दबाव देखने को मिलेगा। एंबिट कैपिटल ने  एल.आई.सी. हाउसिंग और एच.डी.एफ.सी. में बिकवाली की सलाह दी है। एंबिट कैपिटल एल.आई.सी. हाउसिंग के लिए 464 रुपए का और एच.डी.एफ.सी. के लिए 1154 रुपए का लक्ष्य दिया है।

BSNL to lease out nearly 100 apartments in 5 cities

BSNL to lease out nearly 100 apartments in 5 cities

Kerela: BSNL’s decision to lease out its vacant staff quarters and buildings will address urban housing needs to a certain extent. Within the five corporations in Kerala, BSNL is set to lease out close to 100 apartments. Kochi, the commercial hub of the state, is the top destination with 45 1BHK apartments, six 2BHK and two 4 BHK apartments.

“Since the demand for residential plots are going up in cities, our decision to lease out our vacant spaces will sort out housing issue to an extent. Government officials, who get transferred, will benefit as we won’t give our buildings to private individuals and firms,” said a BSNL official.

The 4BHK apartment is located at Gandhi Nagar, while five 2BHK apartments are in Panampilly Nagar and Thevara. Also, 49 1BHK apartments are situated in the same area. There are 16 apartments in Thiruvananthapuram city, it includes two 4BHK flats, eight 3BHK, five 2BHK and one 1 BHK apartments. All of them are at Kaimanam near Karamana. There are only four apartments within Kollam city limits.

In Thrissur, there are 28 apartments. Of these, 19 are 1BHK flats, while six are 2BHK apartments and three are 3BHK apartments. In Kozhikode, there are five 2BHK apartments at Malaparamba. In Kannur, there are two 1BHK and 2BHK apartments.

BSNL would be renting out another around 250 apartments in other towns of Kerala. BSNL officials admitted that they were getting a late response for their advertisements. “It may be because private firms and individuals are exempted. Government agencies take time to complete procedures. Still, we expect that there would be takers,” said a BSNL official.

Real estate sector in Dubai witnessed more international investors

Real estate sector in Dubai witnessed more international investors

Dubai: Real estate sector in Dubai witnessed a considerable amount of increase in the international investors in its real estate market. In the first quarter of this year, there was an increase of 25% in the real estate business. There are many reasons for the investors to get attracted towards Dubai which mainly includes Low oil price, Mortgage rate is low, balance between demand and supply and affordable housing.

 Marwan Bin Ghalaita, CEO, Real estate regulatory authority stated that Dubai is growing as a commercial hub and tourist spot and there is great job opportunity here which is automatically attracting a lot of people to invest in residential as well as commercial sector in Dubai.

 Developers have been suggested to expand its work according to the demand of the people and construct more affordable housing to provide incentives to both National and International investors.  Bin Ghalaita has promised everyone that real estate market in Dubai is in a good shape and this is the right time to invest in Dubai.

Central govt has urged states to notify RERA as soon as possible

Central govt has urged states to notify RERA as soon as possible

New Delhi: Centre is pushing hard for states to notify the real estate regulatory act (RERA) which would bring in transparency in the real estate market. Central government has made it clear that builders should not promote their under construction projects and as a result there is a need for states to implement RERA quickly. A senior housing ministry official has said that following the clarification by the centre, many developers will not be able to do business properly. He also stated that RERA came from May 1 but many states were lazy enough not to implement it.

 Official data says that 16 states and union territories have not notified rules and apart from Maharashtra, Madhya Pradesh and Rajasthan, no other state has made its website.  State government has clarified it that according to the act, current projects are given time till July 31 to get themselves registered failing to which the developers has to pay hefty fine.