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जानें स्मार्ट सिटी की आखिरी लिस्ट में किन किन शहरों को मिली जगह

जानें स्मार्ट सिटी की आखिरी लिस्ट में किन किन शहरों को मिली जगह

नई दिल्ली : शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने आज स्मार्ट सिटी की चौथी और आखिरी लिस्ट जारी कर दी है। इसमें 18 राज्यों के 30 शहरों के नाम हैं। सबसे ज्यादा चार नाम तमिलनाडु से हैं। इसके बाद तीन-तीन नाम गुजरात और उत्तर प्रदेश से हैं। बता दें कि इससे पहले केंद्र सरकार स्मार्ट सिटी की तीन लिस्ट जारी कर चुकी है। इनमें 60 शहरों के नाम थे

मोदी सरकार ने 2015 में स्मार्ट सिटी मिशन की शुरुआत की थी, जिसके तहत 100 शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में डेवलप किया जाना है।

पहले फेज में 20, दूसरे में 13, तीसरे फेज में 27 और अब चौथे फेज में 30 स्मार्ट सिटी के नामों का एलान किया गया है।

आखिरी लिस्ट में 18 राज्यों के 30 शहरों के नाम

1)        गुजरात: राजकोट, दाहोद, गांधीनगर   10)      केरल: तिरुवनंतपुरम

2)        यूपी:इलाहाबाद, अलीगढ़, झांसी  11)      हिमाचल प्रदेश: शिमला

3)        बिहार: पटना, मुजफ्फरपुर     12)      उत्तराखंड: देहरादून

4)        एमपी: सागर, सतना    13)      कर्नाटक: बेंगलुरु

5)        छत्तीसगढ़: नया रायपुर, बिलासपुर   14)      तेलंगाना: करीमनगर

6)        जम्मू-कश्मीर: जम्मू, श्रीनगर  15)      अरुणाचल प्रदेश: पासीघाट

7)        महाराष्ट्र: पिंपरी चिंचवाड़, अमरावती  16)      सिक्किम: गंगटोक

8)        तमिलनाडु: तिरुचिरापल्ली, थूथुकुड़ी, तिरुनेलवेली, तिरुपुर  17)      मिजोरम: आइजोल

9)        हरियाणा: करनाल 18)      पुड्डुचेरी: पुड्डुचेरी

निगम के प्रति लोगों में है रोष, आखिर क्यों…

निगम के प्रति लोगों में है रोष, आखिर क्यों…

बासनी, (जोधपुर) : जेडीए की शिथिलता और लापरवाही से लोगों में गुस्सा है। सार्वजनिक पार्क की जमीन अब आवासीय उपयोग में आने से क्षेत्रवासी परेशान हो रहे  हैं। दरअसल पाल रोड क्षेत्र के शोभावतों की ढाणी स्थित भवानी नगर में खसरा नंबर 775/70 की जमीन पर भूखंड काटकर बेंचे गए तो नक़्शे में यहाँ पार्क भी दिखाया गया, जो कि जेडीए के नक़्शे में भी मौजूद है।

लेकिन बाद में यह नक्शा बदल गया और पार्क कि जगह यहाँ आवासीय भूखंड दिखा दिया गया। अब यहाँ बने पार्क की जमीन पर आवासीय मकान बन चुका है, जिससे यह पार्क सार्वजनिक कि जगह निजी संपत्ति बन गया है। अब लोग पार्क की कमी तो महसूस कर ही रहे हैं, साथ ही कालोनीवासियों के पट्टे भी नहीं बन पा रहे हैं।

क्षेत्र की लोगों का कहना है कि नक़्शे में पार्क कि लिए आवंटित जमीन पर एक व्यक्ति के द्वारा आलीशान बंगला बना कर कब्ज़ा कर लिया गया है। इसकी शिकायत निगम से की गयी और अवैध निर्माण को गिराने की मांग की गयी, लेकिन अभी तक जेडीए प्रशासन ने कोई भी कार्यवाई नहीं की है।

2022 तक झुग्गी मुक्त होगी दिल्ली, मिलेंगे पक्के मकान

2022 तक झुग्गी मुक्त होगी दिल्ली, मिलेंगे पक्के मकान

दिल्ली की झुग्गी बस्ती में रहने वाले लोगों को सरकार जल्द ही पक्का घर देगी। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत दो माह में कर दी जाएगी और सरकार का लक्ष्य होगा कि झुग्गी वासियों को दो किलोमीटर के दायरे में ही घर उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार ने फैसला लिया है कि जनवरी 2015 तक बनी झुग्गी नहीं हटाई जाएगी। इन परिवारों को पक्का घर देकर ही हटाया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार लक्ष्य है कि 2022 तक दिल्ली में सभी पक्के घर होंगे और झुग्गी नहीं होंगी। इसके लिए सरकारी विभागों को जमीन चिहिन्त किए जाने के भी आदेश दिए गए हैं। संगम विहार में पहला 582 मकान बनाने का काम शुरू हो गया है। अगले माह उसकी नीवं रखी जानी है। पूरी दिल्ली में जमीन तलाशी जा रही है और इसी तर्ज पर झुग्गी वालों को पक्के मकान दिए जाएंगे। उनहोंने कहा कि गरीबों ने हमें विश्वास करके भेजा है।

साथ ही लोगो को हमेशा घरों पर बुलडोजर चलने का खतरा रहता है। सरकार ने फैसला लिया है 1 जनवरी 2015 से जो भी झुग्गी बनी है उसे तोडा  नहीं जाएग जब तक उसे मकान दिया दिया जाएगा। इन्हे 2-3 किलोमीटर के दायरे में नए मकान बना कर दिए जायेंगे और जब तक मकान नहीं दिया जाता तब तक हटाने की कार्यवाही नहीं की जाएगी।

 

रेरा पंजीकरण नहीं तो विज्ञापन नहीं

रेरा पंजीकरण नहीं तो विज्ञापन नहीं

भोपाल: रियल एस्टेट डेवलपरों द्वारा गुमराह करने वाले विज्ञापनों को रोकने और रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने मद्द्य प्रदेश के रीयलटेर्स के लिए पंजीकरण संख्या का मूल्यांकन करना अनिवार्य कर दिया है |

1 मई से अस्तित्व में आने वाले प्राधिकरण में मीडिया हाउस के सलाहकार में यह सलाह दी गई है कि जो विज्ञापन बिना पंजीकरण के उसपर रोक लगा दी जाये |

रेरा के तहत प्रत्येक प्रोजेक्ट और रीयल एस्टेट एजेंट के लिए 1 मई से 3 महीनों में प्राधिकरण के साथ पंजीकरण करना अनिवार्य है |

रेरा के चेयरमैन एमपी एंथनी डीए ने कहा की ने “31 जुलाई की समय सीमा के बाद प्राधिकरण के साथ पंजीकृत कोई भी परियोजना अवैध रूप में नहीं मानी जाएगी।

चार रियल एस्टेट परियोजनाएं और 11 रियल एस्टेट एजेंटों ने प्राधिकरण के साथ पंजीकरण के लिए आवेदन किया है | संपत्ति के खरीदारों ने प्राधिकरण की वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करना शुरू कर दिया है। भोपाल से बहुसंख्यक मध्यप्रदेश से अब तक 70 शिकायतें मिली हैं। उनमें से, 50 शिकायतों में नोटिस जारी किए गए हैं जबकि बाकी की जांच की जा रही है |

प्राप्त कुल शिकायतों में से अधिकांश के पास कब्जे में देरी है और केवल 10% खराब गुणवत्ता वाले निर्माण के बारे में हैं जिक्से लिए रियलटर्स को संपत्ति के खरीदारों की भरपाई करने के निर्देश दिए गए हैं |

केंद्र सरकार द्वारा अधिनियमित किए जाने के बाद राज्य ने रेरा के तहत पंजीकरण शुल्क कम कर दिया है। आवासीय और वाणिज्यिक परियोजनाओं के लिए क्रमशः 20 रुपये और 50 रुपये प्रति वर्ग मीटर से, यह अब 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर और 20 रुपये प्रति वर्ग मीटर है।

शिकायतकर्ता को प्राधिकरण को मामूली शुल्क का भुगतान करना होगा। रेरा के पास जाने के लिए तैयार लोग अपनी वेबसाइट के माध्यम से ऐसा कर सकते हैं, जो अंग्रेजी और हिंदी में है। रेरा के तहत, वाणिज्यिक और आवासीय परियोजनाओं का विवरण ऑनलाइन होगा। एक डेवलपर को परियोजना के सभी प्रोजेक्ट क्लियरेंस विवरणों और अद्यतन को सूचीबद्ध करना होगा, जिसमें हर तीन महीने में एक बार बेची और बेची इकाइयों की सटीक संख्या शामिल है।

रेरा परियोजनाओं के मूल्य निर्धारण को नियंत्रित नहीं करेगा, लेकिन यह सुचारू और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा, अधिकारियों ने कहा। यह सरकार और निजी सहित सभी लाभार्थियों से जुड़े सभी रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए लागू है।

सरकार ने अल्टीमेटम देने के बाद की कार्यवाई, चलाया महाभियान…

सरकार ने अल्टीमेटम देने के बाद की कार्यवाई, चलाया महाभियान…

देहरादून : देहरादून में अतिक्रमण को हटाने और अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का महाभियान शुरू किया गया है। शहरी विकास मंत्री के आदेश पर नौ मजिस्ट्रेटों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में  गुरूवार के दिन सुबह छह बजे से घंटाघर से लेकर आईएसबीटी – टर्नर तक अतिक्रमण हटाओ महाभियान चलाया गया।

इस दौरान घंटाघर, दर्शनलाल चौक, आढत बाजार, माजरा समेत कई स्थानों पर भाजपा और व्यापारी नेताओं की अगुवाई में भवन स्वामियों ने इसका विरोध किया। मकान मालिकों ने जमकर अपना विरोध जताया और नारेबाजी भी की, लेकिन अफसरों ने तमाम विरोधों को नजरअंदाज करते हुए अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जारी रखी।

वहीँ देहरादून के डीएम एसए मुरुगेशन ने साफ तर पर कहा कि घंटाघर से लेकर आईएसबीटी – टर्नर तक प्रस्तावित मॉडल रोड के किनारे अतिक्रमण हटाने का कई बार अनुरोध किया गया था, लेकिन किसी भी भवन स्वामी ने इसको गंभीरता से नहीं लिया और अतिक्रमण नहीं हटाया इसीलिए यह महाभियान चलना पड़ा।

साथ ही उन्होंने बताया कि सभी चिन्हित अतिक्रमण हटा दिए गए हैं। यदि किसी ने दोबारा कब्ज़ा करने की हिमाकत की तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जायेगा।

Miami witnessed hike in home sales

Miami witnessed hike in home sales

 

Miami: According to a report by Miami home sales realtors, the city enjoyed its best May season as it witnessed 1,344 single family home sales, the most seen in the month of May.  Miami witnessed a 9.9% hike in home sales as compared to the previous year.  Miami’s total sale has been up by 7.7% while the single family transaction has increased up to 24% and the single family home has seen increase in sale for the past three months.

 Total sale went up to 2,728 homes from 2,532 homes. Sale of condominiums also witnessed an hike of 5.7% year over year. The problem for the lack of more growth in condominiums is the lack of access to mortgage loan and as a result out of 9,307 buildings, only 12 are approved by the federal housing administration loan.

Empress city residents move to Court against Fraud builder

Empress city residents move to Court against Fraud builder

 

Nagpur: Residence of Empress city, Nagpur’s first luxury housing project have moved to Court against the builder for forgery case, cheating and breach of commitment. the litigation was filed last year and till date 5 hearings have taken place but the lawyer of the builder has not appeared in any of the hearings. Pawan kumar Jain, President of Empress city stated that on Thursday residence held a press conference in which the builder did not appear and this shows how serious he is regarding this project.

 Residence complain that till now not a single portion of the project has been completed and has also not implemented the sales deed even after several reminders from the residents. Residents say that the builder has not met any of their demands and there are seepages in the parking and in the flats.

 Representative for the builder blamed the residents and stated that they should co-operate if they want to get things sorted out.